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रे ! मूरख क्यों तू स्वांग रचावै : नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष

उत्कर्ष पदावली रे ! मूरख क्यों तू स्वांग रचावै रे ! मूरख क्यों तू स्वांग रचावै   रे !  मूरख क्यों तू स्वांग रचावै जैसी     करनी         वैसी    भरनी    करनी      का      फल    पावै रे मूरख करनी का फल पावै रे ! मूरख क्यों तू स्वांग रचावै    रे !  मूरख क्यों तू स्वा… Read more

भगवती वंदना (पद)

अब तौ  आजा  मात भवानी तोहि   रिझामें, तोहि   मनावें, रे  ! जग की ठकुरानी अर्चन - वंदन  कौ  विधान का, बोध न, हम  अज्ञानी श्रद्धामय   हो   थाल   सजायौ, करें    भाव   अगवानी कुमकुम  टीका   भाल लगाऊँ, ओढ  चुनरिया  धानी धूप, दीप,   नैवैद्य,  समर्पित,  तुमको   मा… Read more

कृष्ण विशाखा वार्तालाप (पद)

तोकूँ   ढूँढू    वर   मैं   सुयोग जो तेरे मन   भाय   विशाखा, जाकौ   तेरौ     योग चन्द्र    सरीखौ, वीर   बाँकुरौ, तन कौ  रह्यौ  निरोग रूठे  तौ    पढ़   प्रेम  रिझावै, मेटै  आत्म  अनुयोग कृष्ण  कन्हाई  सों   नैन  समावै, सुखद विवाह संयोग क्यों कर… Read more

नाय करी मैंने माखन चोरी (पद)

BHAKTIPAD नाय  करी   मैंने    माखन  चोरी अकारथ  मोय   फ़ँसा   रहीं  रीबात  बनामत कोरी निस दिन छेड़त,कारौ कह-कह,और आप कूँ  गोरी छुपा     बाँसुरी, मारै     कांकर,कहें मटकिया फोरी करौ   भरोसौ  को   विधि  मैया,तू  तो  है बड़ भोरी Read more

जै ले रे गोपाल कन्हाई

जैं  लै   रे  गोपाल  कन्हाई दाल चूरमा, माखन मिसरी, नहीं दूध दधि  लाई रूखी सूखी, गेहूँ     रोटी, जो   मो  सों बन पाई ता संग डरी लाई हूँ गुड़ की,दो अब भोग लगाई का  भावै   तेरे मन   कान्हा, जानै   को  यदुराई - नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष Read more

मोय भयो चाम ते मोह (पद)

कान्हा रे मोय भयो चाम ते मोह कौन  जतन कर  टारूं  हिय ते, चिप्क्यौ   जैसें   गोह आत्मश्लाघा  श्रुति   कूँ  प्यारी, और  सुनावें  ना  टोह दृग  कूँ  प्यारी  रूप    लावणी, पटक्यौ भव की खोह हाथन  कूँ  प्यारौ   रुपया  धन, देखत  नित  ही  जोह उदर  कू… Read more