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Top Romatic Shayari-Muktak

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Muktak : मुक्तक

जीव  के  कर्म  पर  जीव  का   अवतरण जीव   ऊपर    चढ़ा    मृत्तिका   आवरण कर्म    ऐसे    करो   मानवी     तन  मिले सद्गुणों  का  करो, सबहि  अब अनुशरण Muktak : Utkarsh Kavitawali हिंदी पत्रिकाओं, एवं हिंदी साहित्यिक संस्थाओं को सहायतार्थ यथोचित अनुदान दें। … और पढ़ें

उत्कर्षदीप जुगलबंदी [आधार विधाता छंद]

उत्कर्ष   जुगलबंदी तुम्हारा    देखकर  चेहरा, हमें  तो  प्यार  आता है तुम्हारे  हाथ   का  खाना, सदा मुझको  लुभाता है बसे हो आप  ही  दिल  मे, बने हो प्राण इस तन के तुम्हारी आँख का काजल, मगर  हमको जलाता है नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष तुम्हारी  बात  पर   सज… और पढ़ें

मुक्तक : हिन्दू,हिंदी,हिंदुस्तान

मुक्तक : हिन्दू,हिंदी,हिंदुस्तान जय - जयकार  करेगी  दुनिया,हिंद   वीर  मतबारों की अडिग हिमालय सी हिम्मत है,आदत  नही  सहारो की ठान   लिया   हमने  हिंदी  को,शीर्षस्थ      पहुंचाना  है जग   में   केवल  हिंदी   होगी,हिंदी राज   दुलारों   की  Muktak और पढ़ें

मुक्तक :दिल से...

नजारों में  कहाँ  अब  हम,नहीं  पहचान  पाओगे । मगर  जिंदा  अभी हम हैं,कभी  तो जान जाओगे । भुला सकते नहीं हमको,भगत हम श्याम के ठहरे । चले   आयेंगे   यादों   में,भजन जब आप गाओगे ।। नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष श्रोत्रिय निवास बयाना +91 9549899145 और पढ़ें

देशहित में आह्वान (मुक्तक )

बहुत     हुआ   मोदीजी   लेकिन,अब  बातों में सार नही । खामोशी    को     साधे    रहना,वीरों    का    श्रृंगार नही । मारो   इनको    या   दुत्कारो,ये    लातों    के   भूत    रहे । बहुत कर लिया अब तक लेकिन,अब कुत्तों से प्यार नही । और पढ़ें

मासूम कविता : Innocent poetry

मासूम कविता : Innocent poetry नैना    निश्छलता    लिये,मुख से है मजलूम भूख  मिटाने  चल पड़ा, लेकर निज  मकसूम कौन  पराया,  है   सगा,  जाने   नही   निरीह  हँसता - रोता,  खेलता, कभी   रहा   वह झूम नवीन श्रोत्रिय“उत्कर्ष” मासूम कविता : Innocent poetry����… और पढ़ें

मुक्तक : MUKTAK

उत्कर्ष मुक्तक : UTKARSH MUKTAK ------------ ज्ञान बिना मतिमूढ़ मैं,जैसे   जल बिन  मीन कृपा करो   माँ  शारदे, कहता   निर्बल    दीन सार  जगत  का  आप ही, आप  बनी  आधार सदा  साथ  दो  अम्बिका, विनती करे नवीन नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष श्रोत्रिय निवास बयाना Mu… और पढ़ें

मुक्तक : 03

मुक्तक ------------ अगर चाहो मिले मंजिल,करो श्रम साधना पूरी । परिश्रम से मिले सबकुछ,भले हो भाग्य में दूरी । नही होता कभी हासिल,भरोसे भाग्य जो रहते । वही कहते मिले कैसे,बना जब भाग्य मजबूरी ।। ✍नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”     श्रोत्रिय निवास बयाना   +91 84 4008-40… और पढ़ें

मुक्तक : MUKTAK

मुक्तक : MUKTAK मुझे   ले   लो     शरण   में   आप   हे     बजरंग   बालाजी करूँ    इक   ध्यान    बस   तेरा  चढा   है    रंग   बालाजी   करो    वो    आप कुछ ऐसा , हुआ  ना   आज    तक जो हो करो       ऐसा      रहे    सारा    जमाना     दंग     बालाजी … और पढ़ें

मुक्तक - 01

बिना  तेरे  रहे  हम  यार  हमको  था गवारा कब । किया था प्रेम तुमसे  यार  पर  तुमने निहारा कब । जुडी सांसे फकत तुमसे,तुम्ही   इक आरजू मेरी । चले आते सनम फिर भी,मगर तुमने पुकारा कब ।      नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”      श्रोत्रिय निवास बयाना    + 91 84 4008-4006 और पढ़ें

मुक्तक : 04

राज-ऐ-दिल -------------------- मोहब्बत  है  सनम तुमसे,             खुले दिल आज कहते है । छुपाया  था  जो' वर्षो  से,             सुनो ! वो  राज  कहते है । नही  जीना  तुम्हारे  बिन,             तुम्ही   हो   जिंदगी  मेरी । रही दिल में सदा से  तु… और पढ़ें