उल्लाला छन्द
विधान- 13- 13 मात्रा प्रति चरण सममात्रिक 
समचरणान्त में तुकान्त,  मात्रा  दोहे  के प्रथम
चरण के जैसे है । चरणान्त गुरु या लघु लघु
उदा•
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गुरु किरपा से  सब  मिला, गुरु  जीवन आधार हैं
गुरु बिन ध्यान ना ज्ञान है, गुरु भव तारणहार हैं
गुरु  चरणों  में   है   मिला, मुझको जीवन सार है
गुरु  आज्ञा   जो    मानता, उसका    तो   उद्धार है