उत्कर्ष पदावली : कृष्ण कारौ करे जो उजारौ

कृष्ण कारौ करे जो उजारौ कोई   श्यामल  तन  कौ  बोले, कोई .  बंसी . बारौ कारी  दह  कौ  नाग  नथइया, नँद  नैनन  कौ तारौ माखन  चोर, कहे   गोपाला, बू  जसुदा  कौ  प्यारौ चरवाहे   गोविंद  बतामत, ब्रज कौ .  बनौ . सहारौ वृषभानु सुता चित्तचोर पुकारे, मनमोहन जग सारौ शरण गहे “उत्कर… और पढ़ें

Sikharini Chand ke lakshan Or Udaharan

शिखरिणी छंद का लक्षण और उदाहरण Sikharini  Chand   ke  lakshan  Or  Udaharan शिखरिणी छंद परिचय :- यह छंद वर्णिक छंद है, इस छंद के चार चरण होते हैं , यगण, मगण,नगण, सगण, भगण,लघु और गुरु के योग से प्रत्येक चरण में क्रमशः १७-१७  वर्ण  होते हैं ।  क्रमशः छः और ग्यारह वर्ण … और पढ़ें

Radhika Krishna Ko Pyari hai

राधिका - कृष्ण को, प्यारी है प्यारी है प्यारी है राधिका - कृष्ण को, प्यारी है प्यारी है प्यारी है जानती  ये, दुनिया  सारी  है, सारी  है, सारी है  जिन राहों पे  चलते   रहे  अब तलक उन राहों  की हम तो लकीर  हो लिये लूट   न  पाया  यूँ  तो  कोई   भी हमें जिसने लूटा  हमें, व… और पढ़ें

इन्द्रवज्रा छंद [ INDRAVAJRA-CHHAND ]

इन्द्रवज्रा छंद विधान और उदहारण    छंद  विधान : - यह छंद उपेंद्रवज्रा छंद से मिलता जुलता ही छंद है अथवा इन दोनों ही छंदो में नाम मात्र का भेद है।  इस छंद में क्रमशः  तगण + तगण + जगण + गुरु + गुरु [२२१+२२१+१२१+२२ = १८ ] कुल चार चरण ​, १८ मात्राएँ प्रति पंक्ति , दो-दो प… और पढ़ें

सवैया छंद क्या है ? सवैया छंद के भेद कितने हैं ?

सवैया छंद आइये आज चर्चा करते हैं  सवैया छंद पर सवैया छंद क्या है ? सवैया छंद के भेद कितने हैं ?  सबसे पहले आते है सवैया क्या है ?  सवैया चार चरणों का समतुकान्त वर्णिक छंद है, वर्णिक छंदों में २२ से २६ अक्षर वाले छंदो को सवैया नाम से जाना जाता है अर्थात् अन्य से सवाय… और पढ़ें

सोरठा छंद [SORTHA CHHAND]

सोरठा छंद सोरठा छंद  विधान :-   सोरठा छंद दोहा छंद  का विपरीत होता है, इसके भी दोहा के जैसे चार चरण व दो पंक्तियाँ होती हैं , विषम  चरणों में क्रमशः ग्यारह - ग्यारह  मात्राएँ एवं सम चरणों में क्रमशः तेरह - तेरह मात्रायें होती हैं। सोरठा छंद का उदाहरण :- भजो  राम   का  … और पढ़ें

रे ! मूरख क्यों तू स्वांग रचावै : नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष

उत्कर्ष पदावली रे ! मूरख क्यों तू स्वांग रचावै रे ! मूरख क्यों तू स्वांग रचावै   रे !  मूरख क्यों तू स्वांग रचावै जैसी     करनी         वैसी    भरनी    करनी      का      फल    पावै रे मूरख करनी का फल पावै रे ! मूरख क्यों तू स्वांग रचावै    रे !  मूरख क्यों तू स्वा… और पढ़ें

वियोग श्रृंगार-चौपाइयाँ छंद

चौपाइयाँ छंद छंद परिचय :-    छंद सनातनी परंपरा का लोकप्रिय छंद है, जिसका प्रयोग मुख्यतः बाबा तुलसी रचित रामचरित मानस में किया है ।  इस छंद की अन्य की भाँति कुल चार पँक्ति होती है, प्रत्येक  पँक्ति में यति (विराम) क्रमशः दस, आठ, बारह मात्राओं पर  सुनिश्चित है … और पढ़ें

माहिया छंद

माहिया छंद टप्पे माहिया छंद / टप्पे महिया   तुझपे  मरते        जबसे   मैंने  जाना है जां  तेरे     ही     नां        ख्वाब     तिरे     देखे हम प्यार तुम्हे करते         इक  तुमको  पाना है कब आओगे मिलने         क्यों मतलब यारी को … और पढ़ें

माहिया छंद - प्रसिद्ध पंजाबी टप्पे

छंद : माहिया MAHIYA CHHAND छंद परिचय :-   माहिया  छंद को टप्पे गीत नाम से भी जाना जाता है, इस छंद में संयोग और वियोग दोनों पक्षों का चित्रण किया जाता है एवं इस छंद को हास्य-परिहास  में भी लिखा जा सकता है, इस छंद की तीन पंक्तियाँ होती है जिनमे क्रमशः १२-१०-१२ मात्राय… और पढ़ें

मत्तगयंद सवैया और अनुप्रास अलंकार का उदहारण

जय महाकाल  मत्तगयंद सवैया और अनुप्रास अलंकार का उदहारण (मत्तगयंद सवैया ) काल कराल कमाल करे, कब भक्त कपालि अकाल सतावै प्रेम, प्रभूति, पराक्रम औ, परिख्याति, परंजय, पौरुष पावै भाव भरी, मनसे, भगती, भय, भूत, भजा, भवभूत मिलावै ध्यान धरौ नित शंकर… और पढ़ें