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समय" किसके पास है ?

" समय" किसके पास है ? खुद ही खुद को क्यों औरों से खास है ये    समय       है ,  समय      किसके    पास है लिक्खा       है   मैंने   भावों   की   ले स्याही खुशियों   से   मातम , मातम     से तबाही शब्द     वही हैं , तो   क्या … और पढ़ें

बसन्त [Basant]

बसन्त (नई कविता) छाई दिल में उमंग,मन हुआ है प्रसन्न सब झूम रहे है,आया झूम के  ये बसंत चारो  तरफ  हरियाली  है, रुत  ये  खुशियों  वाली है सब के चेहरे खिले हुए  है, छाई होटों पे  खुशहाली है हुआ पूर्ण समय  ज्वलंत, हुआ  सब कष्टो  का अंत सबके चित हुए … और पढ़ें

गृहस्थ सार : 【भाग -2】आल्हा/वीर छंद

घर बाहर का मुखिया नर हो और  नारि  घर  भीतर  जान दोनों   ही  घर   के  संचालक दोनों   का  ऊँचा    है  स्थान बात करे जब मुखिया पहला दूजा   सुने   चित्त    ले  चाव बात उचित अनुचित है जैसी वैसा  ही   वह    देय   सुझाव बिना राय करना   मत  दोनों चाहे  … और पढ़ें

गृहस्थ सार 【 भाग-1】aalha chhand

गृहस्थ : छंद - आल्हा/वीर,बृज मिश्रित ------------------------- जय जय जय भगवती भवानी कृपा कलम पर   रखियो  मात आज पुनः  लिख्यौ   है आल्हा जामै     चाहूँ        तेरौ     साथ महावीर      बजरंगी       बाला इष्टदेव    मन  ध्यान   लगाय निज  विचार   गृ… और पढ़ें

देशहित गीत [ Desh bhakti geet ]

देशहित गीत [ Desh Bhakti Geet ] पाकिस्तान  करे  मनमानी, उसे   जवाब   जरूरी है  मूक  बने  बैठे   क्यों मोदी,आखिर क्या मजबूरी है  छप्पन इंच का सीना फिर, क्यों ये साहस खोता है  मौन  साधना   देख  तुम्हारी, वीर सिपाही रोता है  नैन  अगारी   देश   द्रोह … और पढ़ें

उत्कर्ष दोहावली

उत्कर्ष  दोहावली राधा  जपती  कृष्ण  को, कृष्ण  राधिका  नाम प्रीत  निराली  जग   कहे, रही   प्रीत  निष्काम  राम   नाम   ही   प्रीत  है, राम      नाम वैराग राम   किरण  है  भोर की, रे मानस मन जाग मन की मन में राखि ले,जब तक बने न काम निज कर्मन पर ध्यान… और पढ़ें

विदाई गीत- Vidai Geet

हाय रे ! देखो किस्मत है खोटी, पराये घर,विदा हो जाती है बेटी, किसी ने नाम दिया तो , किसी का नाम है पाती, किसी ने पाला है इसको, किसी का आँगन है सजाती, घर की सब खुशियाँ है जब रूठी, पराये घर,विदा हो जाती है बेटी, बेटी कुछ अरमान संजोती, मेर… और पढ़ें

तांटक छंद : tantak chhand बेटियाँ

पीले  हाथ  किये  बाबुल  ने,अपनी  बेटी  ब्याही है । अब तक तो कहलाई अपनी,अब वो हुई परायी है ।। नीर  झलकता है  पलको से,बेला  करुणा  की आयी । चली सासरे वह निज घर से,दुख की बदली है छायी ।। मात-पिता,बहिना अरु भाई,फूट - फूट  कर  रोते है । अपनी   प्यारी    लाडो   से,द… और पढ़ें

माँ : Maa (Mother day Special)

!! माँ : MAA !! मातृ मूल्य समझे नही,देख गजब संजोग अपनी  माता  छोड़  के,पाहन  पूजत लोग दोनों की महिमा बड़ी,किसका करूँ बखान माँ  धरती  के तुल्य है,पिता आसमाँ जान नंगे  पग, तपती  धरा, मास रहा  जब जेठ भिक्षा   मांगी  मात  ने, भरा   पुत्र  का पेट भ… और पढ़ें

मेरा देश मेरा भारत [doha or chaupai]

"मेरा देश-मेरा भारत" रहमान  संग  में  यहाँ,ईसा,  नानक, राम । वीरों  की जननी यही,भारत इसका नाम ।। विश्व पटल पर छाया न्यारा । प्यारा   भारत   देश हमारा ।। राणा,   पन्ना,  भामा,  मीरा । यही  हुए  रसखान,कबीरा ।। चरक,हलायुध,अब्दुल,भाभा । विश्व पटल की … और पढ़ें

चींटी और हाथी (A Ant or Elephant)

छंद : आल्हा/वीर शैली : व्यंग्य अलंकरण : उपमा,अतिशयोक्ति --------------------------------------------- चींटी  एक  चढ़ी  पर्वत पे,        गुस्से से होकर के लाल । हाथी आज नही बच पावे,        बनके आई मानो काल । -------- कुल    मेटू     तेरे   मैं    सारो,    कोऊ आ… और पढ़ें

मत्तग्यन्द सवैया : चित्र चिंतन

बैठ प्रिया, तटनी  तट पे, यह सोचत है कब साजन आवे । साँझ ढली रजनीश उगो, विरहा  बन  बैरिन मोय सतावे । सूख रही मन प्रेम लता, यह  पर्वत देख  खड़ो मुसकावे । देर हुई उनको अथवा, कछु और घटो यह कौन बतावे । ✍नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”     श्रोत्… और पढ़ें

विदाई गीत [ Vidai Geet ]

विदाई गीत [ Vidai Geet ] हरे हरे कांच की चूड़ी पहन के, दुल्हन  पी   के  संग  चली  है पलकों  में  भर  कर के आंसू, बेटी  पिता  से  गले  मिली  है फूट - फूट के  बिलख रही वो-२ बाबुल  क्यों  ये सजा मिली है, छोड़ चली क्यों घर आंगन कू, बचपन की जहाँ याद ब… और पढ़ें

बेटियाँ [ तांटक छंद ] - Betiyan [Tantak chhand ]

बेटियाँ - Betiyan [ तांटक छंद ] पीले     हाथ  किये  बाबुल  ने,अपनी  बेटी  ब्याही है अब    तक तो   कहलाई अपनी,अब वो हुई परायी है नीर  झलकता है  पलको से,बेला  करुणा  की आयी चली सासरे वह निज घर से,दुख की बदली है छायी मात-पिता, बहिना अरु भाई,फूट - फ… और पढ़ें